Monday, February 3, 2014

कब से अँधेरे में घूम रही हूँ मैं ,
कोई रौशनी तो दिखा।

रोज नई नई  मुश्किलों से जूझ रही हु मैं ,
कोई सहारा तो दिखा।

लोग कहते हैं के मिलवाता है तू सबको उनकी मंजिल से,

मैं तो ना जाने  कब से भवर में फसी हूँ,
मंजिल न सही मंजिल का रास्ता तो दिखा।  


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तू उदास है तो लगता है जैसे रूठ गई मेरी  ज़िन्दगी मुझसे ,
तू खफा है तो लगता है जैसे खफा  हो गई मेरी ज़िन्दगी मुझसे।
तेरी मुस्कराहट में  ज़िन्दगी मेरी ,
जो तू रूठा है तो लगता है जैसे रूठ गई मेरी ज़िन्दगी मुझसे।


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Thursday, January 23, 2014

काश ....................................

काश हम  उनके दिल कि धड़कन बन पाते ,
काश हम उनकी साँसो कि  खुश्बू बन पाते।
वो   कहते हैं के रहते हैं हम तुम्हारे दिल में ,
काश हम  भी उनसे ऐसा ही कुछ कह पाते।

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डरते हैं  सपने संजोने से के कहीं टूट  न जाये ,
डरते हैं किसी के पास जाने से कहीं बिछड़ न जाये।
महोब्बत करके भी इजहार करने से डरते हैं ,
के कहीं जो हाथ पकड़ा वो हाथ छूट न जाये।


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क्यो हम उनसे अपनेपन कि उम्मीद लगा बैठे ,
खुद को भुला केर उनसे दिल लगा बैठे।
जानते हैं के कदर नहीं उन्हें हमारी महोब्बत कि ,
फिर क्यों हम उनसे थोड़ी सी वफ़ा कि उम्मीद लगा बैठे।  

Monday, January 6, 2014

प्यार भरे लम्हे

अपने महबूब  को जी भर केर देखना , मन के सुकून से कम नहीं।
उन्हें बस आँखो से ही छु लेना, किसी इबादत से कम नहीं।
लोग हमसे पूछते हैं के इंतज़ार में क्या रखा है, हम कहते हैं के,
इंतज़ार के बाद उनकी एक झलक मिलना , किसी खुदा की  रहमत  से कम नहीं।




Friday, December 27, 2013

शायरी..................................

कभी अगर तुम रुस्वा हो गए हमसे, 
तो ज़माने से हमारा नाता टूट जायेगा। 

कभी अगर तुम आँखों से दूर हुए हमारी, 
तो आँखों का आंसुओं से भी नाता टूट जायेगा।। 

ये मेरी महोब्बत कहो या पागलपन, हम नहीं जानते। 

पर  अगर कभी तुमने दामन छोड़ा हमारा, 
तो हमसे  ज़िन्दगी का  भी दामन छूट  जायेगा।।






अपनी हर  आरज़ू में  हैं ,
अपनी हर दुआ में आपकी ख़ुशी  मांगते हैं।
 जब  सोचते हैं क्या तोहफा मांगें आपसे ,
तो आपसे  उमर  भर कि आपकी महोब्बत मांगते हैं।

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 अपने आंसूं उन्हें मत दिखा ,
जिन्हे उनकी कोई कीमत नहीं ।

अपने जखम उन्हें मत दिखा,
जिनके पास उसका मरहम नहीं।

अपनी महोब्बत को दिल में दबाये रख बेशक ,

पर  उन्हें मत दिखा  ,
जिन्हे इसकी कोई एहमियत नहीं।  


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सपनो कि  दुनिया है मेरी ,
इसलिए  खवाबों के टूटने से डरती हूँ ,

कहने को तो तनहा नहीं,
मगर तनहा होने से डरती हूँ।

शायद इसे ही महोब्बत कहते हैं,

खुद से भी जयादा भरोसा करती हूँ उन पर ,
तब भी उनकी बेवफाई से डरती हूँ।
 

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अधूरे से थे , हम तुझसे मिलने से पहले।

बिखरे से थे , हम तुझसे मिलने से पहले।

चाहते थे कोई थाम ले आके हमको ,
तूने थमा तो दुनिया में एक पहचान मिली।

वरना खुद से ही अनजान से थे , तुझसे मिलने से पहले।


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मैं तनहा तो नहीं, पैर दुनिया वीरानी सी लगती है तुम बिन,
मैं बेरंग तो नहीं, पैर हेर रंग फीका लगता है तुम बिन।
मैं बेजान तो नहीं, पैर हेर खवाब टूटा सा लगता है तुम बिन।

कैसे कहें  तुमसे,

अपनी हेर दुआ अधूरी लगती है तुम बिन,
अपनी परछाई भी अधूरी  सी लगती है तुम बिन।


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एक तुझमे ही पूरी दुनिया सिमटी हुई नजर आती है मुझे ,
एक तुझमे ही अपनी महोब्बत पूरी होती हुई नजर आती है मुझे।

बेवजह ही पहले मंजिल को ढूंढते फिरते थे हम ,
अब तुझमे ही हर  रास्ते कि मंजिल नजर आती है मुझे।

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आज बेकाबू से मेरे जज्बात क्यों हैं ,
करने कि तुमसे महोब्बत भरी बातें क्यों हैं।
आ रहे हैं मेरी आँखों में आंसूं तुम्हारी याद में ,
तुम्हारी महोब्बत को महसूस करते मेरे ख़यालात क्यों हैं।
आज बेकाबू से मेरे जज्बात क्यों हैं।

करते हैं बेहान महोब्बत तुमसे,
फिर भी तुम्हारे लिए रोज बढ़ती मेरी महोब्बत क्यों हैं।
झुक जाती हैं मेरी मजरें तुम्हे देख केर,
फिर भी तुम्हे जी भर केर देखने कि चाहत क्यों हैं।
इतनी शिद्दत से तुझे सीने से लगाने कि चाहत क्यों हैं,
आज बेकाबू से मेरे ख़यालात क्यों हैं।

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बैठे हैं पलकें बिछाये किसी के इंतज़ार में ,
बैठे हैं दिल को थामे किसी कि याद में।

ना जाने कब होंगी हमारी निगाहें उनसे रूबरू,
बैठे हैं इसी खवाब के पूरा होने के  इंतज़ार में।


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लाखोँ  खवाब टूटे मेरे,
लाखोँ  अरमान टूटे मेरे,
हर  टूटे टुकड़े में बसी थी मेरी ज़िन्दगी,
हर  टुकड़े के साथ ज़िन्दगी के लाखोँ  जज्बात टूटे मेरे।

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क्या तोहफा दे तुझे, ये  हम समझ नहीं पाते ,
क्या नजराना दे तुझे, ये  हम समझ नहीं पाते ,
कभी सोचते हैं के अपनी ज़िन्दगी तेरे हवाले करदें ,
पर तुम्हे ही तुम्हारे हवाले कैसे करदे, ये हम समझ नहीं पाते ।


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Monday, December 23, 2013

शायद ऐसी ही हूँ मैं...........

क्यों लिखती हूँ मैं अपने जज़्बात पन्नों पर ,
क्यों सजाती हूँ मैं अपने अल्फाज पन्नों पर।

क्यों नहीं बता पाती  मैं अपने दिल की हर  बात अपनों को,
क्यों नहीं जता पाती  अपना डर  अपनों को।

सब पीछे  छूट  गए हैं मेरे सब सपने,
सब पीछे छूट  गए हैं मेरे सब अपने।

क्यों नहीं समझा मेरे अपनों ने  मुझे अपना,
क्यों नहीं माना  मेरे अपनों ने मुझे अपना।

क्यों लिखती हूँ मैं अपने जज़्बात पन्नों पर ,
क्यों सजाती हूँ मैं अपने अल्फाज पन्नों पर।

तूने ऐसा दर्द दिया है मुझे जिसे जाता पाना शायद मुश्किल था,
तूने ऐसे बीच रह में छोड़ा है मुझे जहाँ से वापिस लौट जाना शायद मुश्किल था।








Tuesday, January 18, 2011

हाथों को हाथों को छूटते हुए देखा है आज.

दिल टूटता हुआ किसी का हमने देखा है आज,
अश्कों को दिल में सिमटते हुए किसी को  हमने देखा है आज.
आज जाना क बेवफाई क्या चीज़ है ,
जब किसी को बेवफाई करते हुए देखा है आज.
वो बेवफा जिसने की बेवफाई उसके साथ,
उसी बेवफा क लिए तेरेस्ते हुए उसे देखा है आज.
वादा किया था उस ने हमेशा साथ निभाने का,
पर उन्ही वादों को टूटते हुए हमने देखा है आज.
हाथों  को हाथों  को  छूटते  हुए देखा है आज.

तुझे हर गली , हर नगर ढूंढते हैं

तुझे  हर  गली  , हर  नगर ढूंढते  हैं
कुछ  नहीं हासिल , मगर ढूंढते हैं
जहाँ  जख्मी होकर गिर पड़े थे परिंदे
वहां जाकर अब अपने पर ढूंढते हैं
तुझे हर गली , हर नगर ढूंढते हैं
जरा उनकी दीवानगी तो देखिये
जो सहराओं में अपने घर ढूंढते हैं
यहाँ रेगिस्तान है कांच और पत्रों का
हम इसमें हीरे और मोती ढूंढते हैं
तुझे हर गली , हर नगर ढूंढते हैं